किया कराया; नाग-देवता का प्रकोप लक्षण और निदान

यह बिहार के नेपाल की तराई की घटना है। एक 24 वर्ष का युवक शादी के पांच दिन पहले एकाएक सांप की तरह फुफकारने, जीभ लपलपाने लगा। उसकी आवाज बंद हो गयी और वह बिस्तर में सांप की तरह ऐंठता और भयानक आवाज में सांस लेने लगा। वह पैरों पर चलने की जगह जमीन पर लेट कर हाथों –पैरों के सहारे तेज भागता था।

इस बिमारी का किसी को कुछ पता नहीं चला। डॉक्टर ओझा ने बहुत सी तरकीब की, पर कोई लाभ नहीं हुआ। मेरे एक ग्रामीण की उस गाँव में रिश्तेदारी थी। उसके कहने पर उसके माता-पिता उसे मेरे पास लाये। उसकी शादी टूट चुकी थी। वह अपने माता-पिता की इकलौती सन्तान थी। पता चला कि वे बहुत सी जमीन जायदाद के मालिक थे।

यह संयोग ही था कि आसपास के एक साधक ने मुझे संस्कृत के 150 के करीब पुराने पन्ने दिए थे। वे पीले पड़ गये थे, संभवतः उसके गुरु के गुरु के लिखे थे। मैं समझ गया कि किसी ने अभिचार कर्म किया है। समझाने के लिए उस क्रिया को यहाँ दिया जा रहा है।

कालेनाग की केंचुली और मांस, छोटी राई, साध्य के बाल, सांप की चर्बी , हरताल , पीली सरसों, चन्दन , बबूल की लकड़ी – इनका ‘ॐ सर सर सर सर्प देवाय नमः’ से सात दिन हवन करने से स्त्री-पुरुष सर्प-दोष के हो जाते है। उनमें सांप वाले लक्षण प्रकट हो जाते है।

मैंने उसके पेट –नाभि, मूलाधार पर जमाल गोटा घिसकर लगाया और सात दिन तक ईश्वर मूल के पत्ते (पांच) पीस-पिस कर 24 घंटे में चार बार देना शुरू किया; फिर उसी से अपामार्ग की लकड़ी में हवन करते हुए सात दिन बैठाया – ‘मन्त्र’ ॐ अगस्त ऋषि दवे नमः। – उसे केवल दूध पर रखा।

सात दिन में वह पूरी तरह स्वस्थ था। कमजोरी थी, जिसके लिए अन्य निदान किये गये।

पूछताछ करने पर ज्ञात हुआ कि वह अपनी जायदाद का इकलौता वारिस था। बचपन में भी उस पर कार्यवाई की गयी थी। तब जलेसर की पहाड़ियों पर रहनेवाले एक बाबा ने उसका इलाज किया था। उस समय वह जलोदर का शिकार हो गया था। संदेह उसकी चाची पर था। उसे भी एक लड़का था और वह शादीशुदा था। इस युवक के मर जाने या पागल हो जाने की सूरत में पैत्रिक जायदाद सम्पूर्ण रूप से उसे प्राप्त होती।

मैंने एक रक्षा कवच बनाकर उसकी बांह में बाँध दिया और एक मन्त्र, एक विशेष औषधि के सेवन की सलाह दी।

सावधानी और चेतवानी

तन्त्र में जितने प्रकार के अभिचार कर्म किये जाते है; उसको करने से पहले साधक को अपनी सुरक्षा की व्यवस्था करनी होती है; क्योंकि साध्य तो दूर होता है; पर वहाँ होनेवाली क्रिया का सीधा प्रभाव उसपर होता है। यह सुरक्षा के उपाय प्रत्येक विधि में अलग –अलग होते है। अतः किताब में पढ़ कर इन क्रियाओं को करने की कोशिश न करें। यन्त्रणाभरी मौत हो सकती है।

अभिचार के शिकार व्यक्ति की चिकित्सा हो ही जाए, यह आवश्यक नहीं है। इसमें समय का महत्त्व अधिक होता है।

ईश्वर मूल क्या है?

यह एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। जिसमें एक गंध होती है। इसकी गंध से सांप भागते है और इसके पत्तों, जड़ को पीसकर उचित मात्रा में दो-दो घंटे पर तीन बार देने पर सांप जहर उतर जाता है। बेहोश होने पर इसके रस को डिस्टिल्ड वाटर में डाईल्युट करके नसों में इंजेक्शन देने की सलाह अनेक प्राचीन ब्रिटिश डॉक्टरों ने दी है। यह औषधि दुनिया के कई देशों में सर्पदंश के उपचार में प्रयोग की जाती रही है।

 

1 thought on “किया कराया; नाग-देवता का प्रकोप लक्षण और निदान

  1. guruji , mera bhanja mansik roop se kamjor hai,pata nhi uspe kiya karaya hai ya koi bimari, kuch ho sakta hai to bataye
    apna no ya mail id de

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