कालेजादू की भयानकता, सूत्र, विज्ञान और बचाव

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यह एक विवादास्पद विषय है बौद्धिक जगत इसे नहीं मानता. पर इसे न मानने की प्रक्रिया विज्ञानिक नहीं है. वह विषय का अध्ययन करके रिजल्ट नहीं निकालता, बल्कि सीधे इनकार करता है. दूसरी तरफ विश्व के सभी देशों एवं संस्कृतियों में इसको माननेवाले पूरी मानवता के 70% लोग हैं. इसलिए धर्मालय इसकी गहनता से की गई छानबीन और रिसर्च को सामने रख रहा है. जो नहीं मानते और मनमानी आस्था रखते हैं, वे अपनी आस्था के लिए स्वतंत्र हैं.

काले जादू को तंत्र में अभिचारकर्म कहा जाता है. इसके प्रयोगों के विवरण से प्राचीन ग्रंथों के 40% भाग भरे पड़े हैं. यह दूसरी बात है कि जिस प्रकार केवल विधियों को जान लेने से कोई सिद्धि प्राप्त नहीं कर सकता, कोई इन विवरणों को पढ़ कर इन प्रयोगों को भी नहीं कर सकता. यह वहीं वर्णित है. वहाँ कहा गया है कि किस प्रकार गुरु कृपा से अभ्यास करने पर एक दो बरस में इन्हें करने की योग्यता प्राप्त होती है. यह तर्कसंगत भी है, क्योंकि कोई भी वैज्ञानिक प्रयोग विधि जानकर या पढ़ कर नहीं किया जा सकता है. सिद्धियों का मार्ग तो और भी कठिन है, इसमें मानसिक शक्तियों को नियंत्रित करना पड़ता है, पर आज कल लोग इसे Technic समझ रहे है और मुर्ख बनानेवाले भी गली गली बठे सिद्धि बाँट रहे हैं. हमारा केवल एक अनुरोध है. ऐसे लोग कोई भी प्राचीन ग्रन्थ, जो तंत्र पर है पढ़ें. (l ऐसी प्राचीन किताबें मिल जायेंगी जो 1000 से 2000 साल पहले के महान तत्र साधकों की हैं. हिंदी अनुवाद साथ होता है, तब वास्तव में जानकारी होगी कि सिद्धियाँ क्या होती हैं और कैसे प्राप्त की जातीं हैं? इससे वे भी खुश हो जायेंगे जिन्हें विधियों की तलाश है, क्योंकि उन्हें विधियों का जखीरा मिल जाएगा और वे रवरी बाँटने वालों जालसाजों के चंगुल में फंसने से बच जायेगे. तब उन्हे गुरु की मेहनत और अहमियत और उनको चुनने का भी ज्ञान होगा.

कालाजादू विदेशी शब्द है. भारत में इन्हें अभिचार कर्म कहा जाता है. यह शब्द अफ्रीका से आया है मगर क्रियाओं में कोई विशेष अंतर नहीं है. यह रसायन शास्त्र, वस्तुओं से प्राप्त उर्जा तरंगों और तंत्र की कुछ अतिगुप्त सिद्धांतों पर आधारित प्रयोग विधियों पर आधारित क्रियाएँ हैं, यहाँ फिर वही कठिनाई है. यह एक विशाल विज्ञान है. हर प्रयोग का विधान और सूत्र अलग अलग हैं, इन्हें particular रूप में जानना समझाना और सीखना होता है. बहुत से प्रयोगों में सिद्धियों की जरूरत नहीं होती, पर योग्य गुरु एवं उसके निर्देशन में अभ्यास जरूरी होता है, क्योंकि ये विज्ञान के रासायनिक प्र्योंग्प से भीअधिक खतरनाक हैं. इसलिए इसे परम गोपनीय विद्या कहा जाता है. गाँव के ओझा लोग या बहुत सी स्त्रियाँ इसे सीख कर देवी देवता बन जाते हैं और इन तकनीकियों को अपना कर लोगो से पैर धुलवाते हैं. बड़े बड़े बाबा लोग भी इसी से लोगों को अपना अनुयाई बनाते है.

[क्रमशः]

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3 Comments on “कालेजादू की भयानकता, सूत्र, विज्ञान और बचाव”

    1. जो क्रियाएँ दूर से तांत्रिक विधियों द्वारा की जातीं हैं ; उनसे वचाव के लिए ताबीज ;कवच आदि होते हैं ,जिनका विज्ञानं बहुत विस्तृत है . पर ये पहले से धारण करने पर सुरक्षा करते हैं ;शिकार हो जाने पर कोई जानकर ही पुरे लक्ष्ण जान कर एक लिमिट समय में उनका इलाज कर सकता है समय निर्दाहरित होता है .उसके बाद इलाज कटीं हो जाता है.साधारण तौर पर ,धतूरा ,मदार , अपामार्ग ,राई ,हींग ,बिल्ली के बाल , मनुष्य के बाल बाख ,गुग्गल ,लोहबान आदि अनेक पदार्थ हैं,जिनमें से कुछ के मिश्रण का महीने में एक बार हवन करने से गर और उसमें रहनेवालों को निगेटिव उर्जा से बचाव होता है .पर कुछ खिला देने वाली क्रिया का कोई बचाव नहीं है .यह विष प्रयोग है ,,,सतर्कता ही इसका एक मात्र बचाव है.

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