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इश्वर का परिचय

‘इश्वर’ – परमात्मा नहीं है। यह परमात्मा में उत्पन्न होनेवाला एक नन्हा परमाणु है; जिसमे 9 पॉवर –पॉइंट्स होते हैं। यह 0 से 9 तक की उत्पत्ति है। इसी से हमारे अंकगणित के अंको का निर्धारण किया गया है।
यह परमाणु ही शाश्वत नियमों से विकसित होकर ब्रह्माण्ड बन जाता है और वह नन्हा परमाणु उसके केन्द्रीय नाभिक के मध्य बैठकर सरे ब्रह्माण्ड को धारण किये हुए संचालन-पोषण करता है।
यही परमाणु अपने शंक्राणु के रूप में अपनी ही प्रतिलिपियों का उत्सर्जन करके नयी-नयी इकाईओं को उत्पन्न कर रहा है| इसका एक निश्चित प्रोसेस है और सब निश्चित नियमों से होता हैं|
ब्रह्माण्ड के केंद्र में बैठे परमाणु के कारण ही ब्रह्माण्ड का अस्तित्व है और इसमें जीवन व्याप्त है। उसका दिल धड़क रहा है। वह रुक जाये , तो सभी मृत हो जायेंगे।
हमारा जन्म उसी के शंक्राणु से होता है। हमारा जीवन उसी के द्वारा व्याप्त है; इसलिए यही इश्वर है। इसे ही विष्णु , राज राजेश्वर शिव , कामेश्वरी , काकिनी , आदि कहा जाता है। अंग्रेजी में जिसे ‘गॉड’ कहते है ; वह यही है।
पर मुसलमान जिसे खुदा कहते हैं ; वह यह नहीं है। ‘खुदा’ परमात्मा का ही पंथविशेष में दूसरा नाम है| इश्वर भौतिक पदार्थ है,क्योंकि इसका जन्म होता है। परमात्मा अभौतिक पदार्थ है। न तो इसका जन्म होता है और न ही यह नष्ट होता है।

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