अशुभ शुक्र के उपचार एवं टोटके

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प्रथम भाव –

  • अपने भोजन में से कुछ भाग गाय, कुत्ते या पक्षियों को दें।
  • सास- ससुर से शुद्ध चाँदी ग्रहण करें ।
  • गौ मूत्र पीयें।
  • जौ और सरसों दान में दें ।
  • पत्नी के सिर में सोना पहनायें।
  • भगवान पर विश्वास रखें।

द्वितीय भाव –

  • चौपाये जानवर का व्यापार करें ।
  • आलू , दही और मक्खन का दान दें।

तृतीय भाव –

  • अपनी पत्नी के साथ ही दुबारा शादी करें।
  • घर में संगीत-नृत्य बंद करें।

चतुर्थ भाव –

  • अपनी पत्नी के साथ दुबारा शादी करें।
  • सदाचार का पालन करते रहे।

पंचम भाव –

  • सदाचार बने रहें ।
  • गायों की सेवा करें।
  • माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध या प्रेम विवाह न करें।
  • पति-पत्नी दोनों अपने गुप्तांग दूध से धोएं।

षष्ठ भाव –

  • नारी मात्र का सम्मान करें।
  • घर की स्त्रियाँ कहीं भी नंगे पाँव न रहे।

सप्तम भाव –

  • सफ़ेद के अतिरिक्त अन्य रंगों की गायों की सेवा करें , और उन्हें भोजन दें।
  • दहेज़ में कांसें के बर्तन लें।

अष्टम भाव –

  • भगवान् के नाम पर भी कोई दान स्वीकार न करें।
  • पूजालयों/मंदिरों के सामने मस्तक नवायें।
  • गटर/गंदे नालें में कुछ फूल या ताम्बें के सिक्के डालें।

नवम भाव –

  • घर की नींव में चाँदी और शहद डालें।
  • मांस , मछली , अंडा शराब आदि तामसिक वस्तुओं का सेवन न करें।

दशम भाव –

  • शनि के उपाय करें।
  • घर की पश्चिम दिशा की दिवार कच्ची रखें।
  • परनारी से रति न करें ।
  • अति कामुकता से बचें।

एकादश भाव –

  • बुध के उपचार यहाँ भी काम देंगे।
  • शनिवार को तेल का दान करें।

द्वादश भाव –

  • गौदान करें।
  • पत्नी द्वारा नीले फूल जमीन में गाड़ जाएँ।
  • पत्नी किसी न किसी प्रकार दान करें।
  • शुद्ध घी का दिया जलाएं।

शुक्र के फल उपाय एवं टोटके

पहले भाव में शुक्र के फल उपाय एवं टोटके

यहाँ का शुक्र शनि की स्थिति , भाव 7 , 10 और बुध की स्थिति पर अच्छा बुरा फल देता है .  7-10 खाली न हों और उनमें बुध, राहू – केतु के सिवा कोई अन्य ग्रह हो तो काम रेखा होती है. ऐसे स्त्री – पुरुष बेहद कामुक होते हैं और धातु , शरीर , धन सम्पति बर्बाद होती है. अपयश भी होता है.

शनि मंदा भी हो , पर 7-10 में बुध या राहु केतु हो , तो मच्छ रेखा होती है. जातक – जातिका को धन सम्पति का सुख होगा, पर आराम और मानसिक सुख बृहस्पति एवं भाव 8 की हालत के अनुसार होगा.

इस योग के जातक जातिका नजरो के मादक तीर  के माहिर होते है. इश्कबाजी और काम सुख इनकी प्रवृति होती है और मीठी बातों की मिठास में इन्हें याद ही नहीं रहता की ये कहाँ जा रहा है. दो या दो से अधिक औरतों से सम्बन्ध होते ही, नजर और फेफड़े की बीमारी होगी.

बुध यानि शनि शुक्र से पहले के घरो में हों तो इश्कबाजी में धन स्वास्थ्य बर्बाद करेगा. यदि बुध के साथ शुक्र के दुश्मन हुए , तो स्त्री को पुरुष और पुरुष को स्त्री रति में संतुष्ट नहीं कर पायेगा.

25वें साल शादी हो, तो जीवन साथी की मृत्यु होगी या विच्छेद होगा. राहु 7 में हो, तो दीवानगी की हद तक मस्तिष्क विपरीत लिंगी के आकर्षण में होगा. सूरज मंद हो, तो गृहस्थी मंदी होगी. औरत को औरताना और मर्द को सदाबहार सी पत्नी मिलेगी. पर उसकी हसरत न मिटेगी. रक्त धातु की बिमारी होगी.

इस भाव के शुक्र का फल बृहस्पति और बुध की दशा पर निर्भर करता है. शनि शुक्र की आखें है. इस भाव के शुक्र में वह शुभ होता है. घर-बार , धन – दौलत में आला शाह हो सकता है. गरीब या मांगनेवाला तो हरगिज ना होगा. पत्नी लक्ष्मी जैसी होगी, जिसमें विवेक और ममता होगी.औरत की कुंडली में है , तो मर्द अच्छा पुरुष होगा.ऐसे जातक जातिका पुस्तैनी आगे कम और पीछे अधिक होता है.

बृहस्पति 2 में हो , तो लड़की को अच्छे पुरुष और लड़के को अच्छे स्त्री से इश्क होता है. इसमें अक्सर जुदाई होती है, पर काम क्रीडा होती रागी होती है. इससे स्त्री का पति और पुरुष की पत्नी विरक्त होती है और सन्तान नहीं होती है या होकर मर जाती है. कामशक्ति या इच्छा भी घट जाती है.

बुध मंदा हो, तो औरत मर्द दोनों, जिसकी कुंडली में यह योग है, कामशक्ति रहते हुए भी सन्तान उत्पन्न करने की क्षमता नहीं रखते. औरत में अंड का और पुरुष में शुक्राणु का उत्पादन नहीं होता है. 9-12 मंदे हो, तो औरत दुखिया और मानसिक शारीरक कष्ट में रहती है. 2,५,9 में राहु या केतु हो, तो कृत्रिम मैथुन करना शरीर, धातु, धन खेत आदि का जर्रा उड़ देगा. शादी के बाद स्त्री  का.

शुक्र के साथ 2 में राहु या केतु हो , तो पराई सन्तान को अपना बनाना पड़ता है. भाव 8 खाली हो , तो मर्द हो या औरत सन्तान उत्पन्न करने में अक्षम होता है. बृहस्पति 8,9, 10 में हो  तो गृहस्थी मंदी होगी. संतान की शादी  में विघ्न होगा यदि चंद्रमा केतु या सूरज राहु साथ में हो.

इस योग में सन्तान हीनता कॉमन होती है और अक्सर कमी औरत या मर्द के धातु में होती है.

खून में वीर्य की या शुक्राणु कीकमी हो या औरत को न बनता हो, पर यौनांग या मूत्र की बिमारी नहीं होती है. धातु पतन, लिकोरिया आदि हो सकता है. मंगल का उपाय करें और खून बनाने की दवा खाए. आयरन टॉनिक से लेकर एनी कुछ भी. पर शराब न पिए. लेकिन पहले धातु पतन या लिकोरिया बंद करने का उपाय करें. देवता हनुमान और गणेश जी , विष्णु भी. धातु सोना, ताम्बा;रत्न- मूंगा , पुखराज, माणिक्य.

भाव 3 के शुक्र के फल उपाय एवं टोटके  इश्क का परवाना. स्त्री हो या पुरुष प्रणय के मामले में बहुत बड़ा दायरा होगा. हर सुंदर विपरीत लिंगी से इश्क ही इश्क होगा, भले ही बात तक न हो. पर हर जगह अपना ही जीवनसाथी दोस्त और मददगार होगा. तमाम लम्पटपन जानते हुए.

ऐसे जातक जातिका को इश्क का राज खुल जाने  की परवाह नही होती. ये मंगल से प्रभावित होते है और मंगल नेक हो , तो शालीन रहते है और मंगल मंदा हो, तो नाली का पानी पिने से भी नहीं हिजकते. बदनामी और धन के अपव्यय के सिवा इनसे इनको विशेष हानि भी नहीं होती. हाँ अपनी औरत इके सामने दबना पड़ता है. ऐसे योग वाले की पत्नी या पति अच्छे और एकव्रत होते है. 2, 3 में केतु , शनि या बुध हो, तो मिटटी और औरत के प्रयोग की वस्तुएं , गौशाला , अनाज के व्यापार में लाभ होता है.

बृहस्पति 9 में हो. तो इस शुक्र का फल विषैला होता है. शरीर , पत्नी औरत का सुख , संचित धन , सब में घुन लग जाता है. बुध 11 हो , तो 34 के बाद अवनति शुरू हो जाती है. शुक्र की सभी वस्तुओं में हानि होती है. 9-11 में मंगल हो, तो भी शुक्र बर्बाद होगा.

बुध और मंगल दोनों 1 में हो, बुध 5 में हो , 9 में हो , 11 में हो, तो 34 वर्ष की उम्र तक लड़कियों के चक्कर में बर्बाद होगा. खानदानी या अपनी कमाई जायदाद का कोई सुख नहीं मिलेगा. बुध के साथ कहीं भी शुक्र के दुश्मन हो, तो शुक्र यानी औरत , असंतुष्ट और धन का कोई सार्थक उपयोगी नहीं होता.

भाव के अनुसार उपाय करें. जिस भाव के कारण शुक्र ख़राब हो रहा है, उसका उपाय करें. गाय की सेवा करें. कुत्ते को मीठा रोटी दें. औरतों का सम्मान करें. बीमारी इत्यादि में जो अक्सर कामशक्ति और रति से सम्बन्धित होती है , चिकित्सा के साथ दुर्ग मन्त्र जपें. देवता दुर्गाजी, रत्न पन्ना, धातु चांदी. कन्या पूजा करें.

भाव 4 के शुक्र के फल उपाय और टोटके

इस शुक्र को यदि किसी दूसरे ग्रह की सहायता नहीं मिलती और भाव 2  खाली हो, तो दो शादी होती है और दोनों औरत या मर्द जिन्दा होते है. स्मरणीय है की  ज्योतिष में तलाक की मान्यता नहीं है. सम्बन्ध विच्छेद का अर्थ त्याग देना  है. औरत का स्वास्थ्य और गर्भाशय संकट में होगा.

इसका फल बृहस्पति पर निर्भर करेगा, जब तक बृहस्पति का सम्बन्ध शनि से न करें. वरना बुध के अनुसार. जीवनसाथी से सम्बन्ध औपचारिक होगा,  पर पत्नी य पति खूब ऐश करेंगे. भावुक होगा और बेहद कामुक होगा. स्त्री भी. दोस्ती के दायरे बड़े होंगे. अपने को राज में रखेगा. इश्क करेगा और टूटकर करेगा . शनि भी शुक्र के साथ हो और चंद्रमा नीच हो बुध के साथ शुक्र काशत्रु हो, तो देवदास बन जायेगा.

जो भी हो अमर्यादित इश्क बर्बाद कर देगा. किसी पानी लगाने जगह, कुआं, तलाब आदि को भरकर बनाया गया मकान वंश समाप्त कर देगा. चन्द्रमा का साथ हो तो घर का आटा गिला. गरीबी होगी जो होगा , वह  भी काम न आएगा.

कासे के गुल्ले में सुरमा भरकर खेत में दबाये. बुध को बढ़ाने का उपाय करें. कन्या पूजन , भोजन, दुर्गा की आराधना करें. पीपल में जिसकी जड़ में पत्थर नहीं पानी दें. रत्न सोना , पन्ना, पुखराज, देवता – दुर्गा , गणेश है.

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