अशुभ केतु के फल , उपाय एवं टोटके

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

अशुभ केतु के उपचार एवं टोटके

प्रथम भाव केतु के फल  उपाय, एवं टोटके   –

काला और सफ़ेद दुरंगा कुत्ता पालें। या ऐसे कुत्ते की देखभाल करें।गली के आखिरी मकान में न रहे।चंद्रमा के निर्दिष्ट उपचार करें।लाल रंग का रुमाल/कपड़ा जेब में रखें। इसमें मानसिक चंचलता  और कामुकता अधिक होती है . गृहस्थ जीवन, दाम्पत्य जीवन, पौरुष की दुर्बलता , अत्यधिक चंचलता में काम का बिगड़ना  आदि इसके खराब हो जाने के लक्षण हैं.इसका उपाय वृहस्पति है. यानि गणेश जी की सेवा, मन्त्र , आज्ञाचक्र पर ध्यान, मंदिर, पुरोहित, गुरु, पिता आदि बुजुर्गों के चरण छू कर या मानसिक श्रद्धा से आशीर्वाद लेना , यह सातवें खाने को अधिक प्रभावित करता है यानी पत्नी, गृहस्थी  , संचित धन, शरीर और दाम्पत्य सुख . सातवें खाने की स्थिति के अनुसार उपाय करें . खाना 2 और 7 खाली हों तो बुध और सुकर दोनों बर्बाद होगा. प्रेम लड़की,बकरी ,फूल , तोता , बुआ , शरीर के आयतन इत्यादि पर बुरा प्रभाव बुध के कारण होगा. सरीर, धातु, स्त्री, संचित धन, गाय, त्वचा ,खेत ,आदि शुक्र से बर्बाद होंगे.

कुत्ते और गाय को रोटी दें .  मूंगा पहने . सोने  में . लाल रंग की सूती टोपी पहने. बुध की शाम सूर्यास्त से दो घंटे पहले से सूरज डूबने तक  लड़की को, और सुबह लड़कों को ब्रहम महूर्त से सूर्योदय के दो घंटे बाद तक ताम्बे का या सूरज की किसी वास्तु का संयोग जहर होगा, उनके लिए.शादी के बाद शनि को मजबूत करें. बबूल और पीपल के पत्ते छल का चूर्ण अ कासेवन करें और उनमें पानी दें. बुध के लिए आज्ञा  चक्र पर केशर के तिलक लगाएं.  यदि बुध पर बुरा असर हो, तो तुरंत शुक्र का उपाय भी करें. उसके बाद वह खराब होगा. पत्नी का ध्यान रखें. उससे गाय को रोटी दिलवाएं.उसे गुरु पूजा करके गुरु मन्त्र जप्न्ने के लिए कहें और रक्त बढाने के उपाय करें.

मन्त्र -ॐ .  सात स्वर में सुभाह एक माला जपें .

द्वितीय भाव्  केतु के फल एवं उपाय   –

लंगोट बांधें वर्सना मुसीबत में पड़ेंगे . सदाचार का निरंतर पालन करें। शुक्र , बुध  और चन्द्रमा को सुधारें . कन्या पूजन भोजन कराएं. गाय को रोटी दें. माता की सेवा करें. इसमें उतार चढ़ाव बहुत होता है. विशेषकर धन, आमदनी, स्त्री, शादी, और ऑफिस या व्यापार के काम में .मंगल का रत्न या धातु पहनें . यानी मूंगा  सिद्ध करवा कर पहनें. मोती भी लाभ प्रद होगा .घूमती हुई किस्मत होगी. सफ़र भी रहेगा और लाभप्रद रहेगा.धन का फ्लो भी होगा, तो केवल कमीशन ही अपना होगा. यह कमीशन एजेंट या उस जैसे कारोबारी का योग है.आठ खाली हो, तो तो शुभ होगा.8  में चन्द्रमा या मंगल हो,आयु बाधा हो सकती है.

किशोर अवस्था और जवानी में ऐयाशी से बचें. वृहस्पति मजबूत होगा, तो बेहद कामुकता होगी. न बचे, तो संतान हीनता होगी. पौरुष दुर्बलता के कारण पत्नी वियोग हो सकता है.  ऐसा हो गया है, तो योग्य वैद्य या गुरु से संपर्क करें. लोहे को खूब लाल करके पानी में 21 बार बुझायें और इस पानी को दिन में चार बार पियें.

मन्त्र – ॐ नम: शिवाय .

तृतीय  भाव केतु केफल, उपाय एवं टोटके   –

बिना सोचे समझे किसी को समर्याथन देना, किसी के लिए गवाही देना, उसकी तारीफ़ करना या हाँ में हाँ मिलाना  आपको बर्त्राबाद कर देगा. आत्मबल आयर खुद मुख्तारी का भाव बाधाएं. इसके बाद ही कोई उपाय लाभ देगा.  घुटनों, कमर   , हड्डी के दर्द होंगें. स्त्री पुरुष दोनों को धातु की दुर्बलता हो सकती है. धातु का वहन, लिकोरिया आदि होंगें. ज्योतिषीय  उपाय सोना और पुखराज है. जो यह नहीं कर सकते पीपल में पानी डालें.  इसमें धन का अपव्यय , मुकदमें और प्रदेश वास होता  है  इसके लिए  दुर्घटना और नुक्सान से बचे रहने के लिए सूर्य और चंद्रमा से सम्बन्धित वस्तुएं बहते पानी में डालें। केशर का तिलक लगाएं. पहले भाव के ही देवता और मन्त्र  होंगें ।गुरु की वस्तुएं बहते पानी में डालें।

चतुर्थ भाव  केतु के फल,  उपाय एवं टोटके  –

संतान पक्ष कमजोरहोगा. पत्नी या तो बाँझ होगी या अधिक लडकियां पैदा करेंगीं. धातु दोष, मूत्र दोष, डाइबिटीज , धातु पतन ,  सेक्स की कमजोरी , दाम्पत्य सुख में कमी. माता और आयु, दोनों बीमार होंगें. चंद्रमा के काल में मुसीबतें अधिक होंगीं. पानी में भींगे कुत्ते जैसी दशा होगी. मन बुझा रहेगा . जीवनी शक्ति की कमी होगी.  इसका एक मात्र उपाय जीवित वृहस्पति है यानी पिता का आशीर्वाद. पपर कष्टों से छूटकर या राहत तब मिलेगी, जब कोई वास्तविक ग्यानी गुरु, जो आध्यात्म का रहस्य जानता हो, मिलेगा.  उसी के प्रयत्न से बीमारी, अवसाद, पत्नी का कष्ट और संतान की प्राप्ति होगी. ज्योतिष में सिर्फ पुत्र को संतान मन जाता है. ईसे तेवे वाले स्त्री पुरुष को  ऐसा विद्वान् गुरु ढूंढ कर गुरु बनाना चाहिए. भले दीक्षा न ले , पर पूजा आशीर्वाद जरूरी है. इसके भी देवता और मन्त्र गणेश जी एव ॐ हैं.

पंचम भाव केतु के फल , उपाय एवं टोटके  –

इस भाव का केतु अन्य  मामलों में अच्छा होता है.यह वृहस्पति के कुंडली में खराब होने पर या , ऋण होने पर या,शनि साथ होने या घर 9 में होने या चंद्रमा साथ होने या चंद्रमा 4 में होने पर खराब होता है. तब भी जब धन दौलत पद आदि ठीक ठाक हो .  इस भाव का केतु संतान के मामले में भी ठिक होता है. इसका बुरा असर सांस, फेफड़े  , और धातु पर पड़ता है, बचपन में गलत आदतें लगतीं हैं, जिनसे लिंग =.गंदे  योनी में रोग होता है संतान नहीं होती और पत्नी असंतुष्ट रहती है. यह बेहद कामुक बनता है और यही इसकी खराबी है.  गंदे बुरे सपने और विचार अटें हैं. राह चलते किसी महिला को देख का उत्तेजना  भड़कती है, वृहस्प्प्ती और सनी ठीक न हुए , तो रेपिस्ट होता है. चाहे रेप न करे, पर विचार  आतें हैं.

पहले भाव का उपाय करें. बेल के कोमल पत्ते का शरबत सुबह में, पीपल का शाम में काली मिर्च के चूर्ण के साथ पियें. रत्न पुखराज और मोती है , गुरु कृपा से कष्ट कम होंगें . शिवलिंग पर जल चढ़ाएं ,  गुरुपूजा-पाठादि द्वारा गुरु की शांति करें।शनि की वस्तुएं बंध करके न रखें। लोहे के संदूक खुले रखें। दरवाजों में लोहे के ताले न लगायें।

षष्ठ भाव केतु के फल, उपाय एवं टोटके  –

यहाँ का केतु वृहस्पति को मंदा नहीं होने देता .पिता का सहयोग मिलता है, इससे यह खुदमुख्तारी से भरा होता है.एक खूंखार कद्दावर कुत्ते से इसकी उपमा दी जाती है. इस भाव का केतु , अकेला हो, तो शुभ ही होता है, पर बुध साथ हो, तो सामान्य होता है.वृहस्पति का साथ, मंगल का साथ भी अच्छा नहीं होता. तेबे में शुक्र और वृहस्पति की स्थिति इस प् प्रभाव डालती है. यहाँ भाव 6 में शुक्र का होना, शुक्र को बर्बाद करता है. किसी सम्बन्ध के बनाने  से भी.वृहस्पति के लिए  होता है,दौलत और दबदबा देता है, .साहस और्बदला लेने किप्र्वृति होती है.अपनी बात गुप्त रखता है और धन जमा करने की प्रबल इच्छा होती है.

इस भाव के केतु का वही उपाय होगा, जो पहले भाव का है. साथ में लक्ष्मी और नारी पूजा भी. गाय को रोटी खिलाएं , घर में पिली मिटटी रखें .  इससे स्त्री  को मालिस करके स्नान करने को कहें. पत्नी क्या, हर नारी का सम्मान करें. इसी तरह साधू, गुरु, पिता और बुजुर्गों का भी दोनों आशीर्वाद लें . इसी लिए सोने या दहेज़ में मिली अंगूठी को बाएं हाथ की तर्जनी में पहनना शुभ होगा .पंचम भाव में दिए गये उपचार इस भाव में भी करें।

सप्तम भाव केतु के फल उपाय एवं टोटके  –

इस भाव का केतु धन दौलत संतान औरत सभी के लिए अच्छा होता है. मंदा असर १२ वर्ष तक रहेगा. जब संतान पैदा होगी, चाहे लड़की ही हो सभी मंदे  असर दूर हो जायेंगे. पर औरतों के मामले में लालच जारी रहेगा. केतु को कुत्ता मन जाता है, गधा भी. हर खाने में यह प्रवृति होती है. इस भाव में बैठा केतु शुक्र और बुध की स्थिति के अनुसार चलेगा  .यानी यह पत्नी याबेती के नियंत्रण में रहेगा और हानि, बेइज्जती आदि उसी के कारण होगी  विशेष कर तब, जब वह औरत या लड़की परिवार की न हो.    यदि इनमें से कोई इसी भाव में हो, तो शुभ ही होगा. यदि फिर भी जातक अपनी मुसीबतों का रोना रोता है, तो वाह उसकी खानदानी नस्ल की प्रवृति होगी. या वह गुप्त प्रेम में लुट रहा होगा.

बुध शुक्र और वृहस्पति का उपाय करें. मिटटी के गमले में पली मिटटी में हल्दी या नीबू का पौधा लगाएं या बगीचे में.छट्ठे भाव का उपाय करें . रत्न हीरा और पुखराज है. पन्ना भी . रत्न मन्हंगे होते हैं. यह नहीं कर सकते, तो बरगद, पीपल में पानी दें.  34 की उम्र तक शत्रु और दुश्मन ग्रहों के परेशानियां रहेंगी, जो वृहस्पति के यानी गुरु के सहयोग से परास्त होंगे. 34 के बाद वे सभी खुद दर कर भाग जायेंगे.  झूठा वादा और नीच शब्दों का प्रभाव बहुत बुरा होगा. यह जातक यदि बर्बाद होगा, तो अपनी बुद्धि से ही होगा यानी जब कुंडली में बुद्ध और वृहस्पति नीच हो. देता और मन्त्र दुर्गा, लक्ष्मी और गणेश जी के होंगे,

अष्टम भाव  केतु के फल, उपाय एवं टोटके  –

यह जातक बहुत सेंसेटिव होगा. यह आनेवाले समय को तुरंत भाफ लेगा. जो सामने होगा , उसके बारे में उसके बिना बताये ही उसकी प्रवृति और सोच को समझ जाएगा. किस्मत की चाल     दो रंगी होगी और शनि की स्थिति पर निर्भर करेगी . दौलत भले मिल जाय, पर गृहस्थी  में सुख न होगा . संतान हो कर मरेगी . 34 तक की औलाद की कोई गारंटी नहीं होगी. इस काल में काम हो कर बिगड़ेंगे . वाहन दुर्घटना के योग होंगे, जो पैर को हानि पहुंचाएंगे . फेरते समय माला टूटी वाली दशा होगी .  संतान 34 के बाद हिशाय्द जीवित रहेगी. भाव 6 में बुध हो, तो पहले की भी रह सकती है. लड़की जीवित रहेगी.  शुक्र और शनि  का किसी रूप में सम्बन्ध हो, तो पत्नी सुन्दर पर कुटिल होगी. कोई जरुरी नहीं कि वह व्याहता हो, कोई बाहरी भी हो सकती है.  इस योग की स्त्री के शुक्र को बुध और  मंगल का संयोग न मिल रहा हो, तो वह सेक्स के मामले में सदा असंतुष्ट रहती है. पति से भी . संतान का दुःख इसे भी भोगना होता है.

बुध का उपाय करें. दुर्गा जी और कन्या पूजन. बुध नीच हो, तो कुत्ते को गोल रोटी गुड के संयोग से खिलाएं. पक्षी भी बुध होतें हैं. उन्हें  मीठे अनाज फुला कर खिलाएं. मंदिर में काला सफ़ेद दो रंग का कम्बल पिली मिठाई और केले के साथ दान करें ,  यह खाना श्मसान  से सम्बंधित है. इस भाव में यदि कोई गृह है, तो उसकी वस्तु काले कम्बल में लपेट कर श्मसान में दबाएँ. कोई अघोरी या श्मसान साधक मिल जाए, तो सेवा करके उपाय पूछे.

नवम भाव केतु के फल ,उपाय एवं टोटके  –

यह भाव पैत्रिक प्रभाव का है. पैत्रिक घर, पूर्वज या कुंडली का वृहस्पति जैसा होगा वैसा ही होगा .  स्त्री पर मायके, ससुराल, पिता और ससुर दोनों पक्ष का प्रभाव पड़ेगा.हाथ और मस्तिष्क के हुनर से धन कमाएगा यानी किसी न किसी क्षेत्र का विशेषग्य होगा, जो दस्ती काम करता हो.शुक्र, चंद्रमा , वृहस्पति और शनि  का प्रभाव इस पर पड़ता है. कुंडली में ये जैसे होंगे वैसा ही केतु होगा . यहाँ का केतु पिता का अनुपालक होता है , इसे मंदिर, धर्म, साधू , गुरु, में श्रद्धा होती है. तीन संतान का योग होता है.मंगल तीन में होने पर संतान का दुःख होता है .शनि  मंदा हो, तो चोरी चालाकी की प्रवृति होती है . कान, रीढ़, पैर, घुटने, हड्डी, धातु की  किबीमारी का खतरा रहता है. वाहन का बार बार इंजन खराब होता है. शनि नीच हो, तो वाहन चोरी में जेल जाता है.  स्त्री सुख में वायु दोष या पित्री प्रभाव से कमी होती है.

शनि को देखें . यदि यह कुंडली में नीच है, तो वह जिस खाने या भाव में है, उसके अनुसार उपाय करें. वृहस्पति  को भी देखें. इसका उपाय उस खाने के अनुसार करें सामान्य उपाय में घर और कान में सोना रखें. शनि के लिए बबूल के पत्तों का चूर्ण काली मिर्च के साथ सेवन करें. पीपल का चूर्ण भी लाभ दायक है. घर में सोना रखेंगे, तो वह बढ़ता जाएगा. धातु दोष के लिए सोने और लोहे के सयोग से बनी दवा  का प्रयोग करें. मंदे  हालात में लोहे का छल्ला शनि की ऊँगली में और तर्जनी में सोना पहनें. रत्न नीलम और पुखराज है. पर मैं नीलम की सलाह नहीं दूंगा. यह खतरनाक है. लोहे के छल्ले से काम चलायें. यदि यह योग स्त्री का है, तो उसे और पुरुष को भी काल भैरव तेल का प्रयोग करना चाहिए, इसके बनाने की विधि लिंग योनी दोष में दी  गयी है

दशम भाव केतु के फल, उपाय एवं टोटके   –

ऐसा जातक चुप चाप अपना काम करते रहने वाला होता है. सुखी होता है और शनि  कुंडली में खराब न हो तो संतान भी अधिक और अच्छी होती है.भाग्य अच्छा होता है. मिटटी से भी धन बनता है. बनता है. जब शनी कुंडली में मंदा हो, तो 24 की उम्र से 48 तक बहुत दुःख होता है. विशेष कर  संतान के मामले में . संतान उत्त्पन्न नहीं होती या उत्त्पन्न  होकर मर जाती है.  मंगल 10 में साथ हो  या 3 में हो तो बहुत दुःख देता है.  गृहस्थी और कारोबार  में गड़बड़ी होती है. शनि 4 में हो तो संतान का दुःख होता है.

24 के बाद चांदी के एक छोटे ढ्क्कन वाले कूड़े में शहद भर कर किसी वीराने में दबाएँ.   औलाद का दुःख हो तो, शनि का उपाय करें. शनि की वस्तु का दान करें और भैरव जी को तेल चढ़ाएं तेल का प्रयोग कम करें. इसकी पहचान यह है कि  सम्भोग में वीर्य सरलता से नहीं निकलता और उसमे चिर्चिरापन , गर्मी या जलन होती है. घर की नींव के पत्थर तले दूध और शहद रखें।48 वर्ष की आयु के बाद घर में पालतू कुत्ता रखें।अच्छा व्यवहार और अच्छा चाल – चलन बनाएं रखें।चाँदी के बर्तन में घर में  शहद रखें।

एकादश भाव केतु का फल, उपाय एवं टोटके    –

यह राजयोग है. यदि खाना ३ में बुध न हो. राजयोग मतलब राजा जैसा जीवन होगा. कोई राज सम्बन्ध होगा. धन, दौलत, दबदबा और अधिकार होंगे; मगर यह जातक खतरनाक नहीं होगा. दूसरों का भला ही करेगा. औरत के तेवे में यह योग हो, तो वह रानी जैसी जिन्दगी की मालिक होगी. 11 , 23 , 36 और ४८ वर्ष की उम्र  शुभ है. लाभ होगा. शनि तीन में हो, तो अचल सम्पति का मालिक होगा.लड़के के जन्म तक माता गुजर जायेगी या बीमार रहेगी या साथ न होगी. अपनी आयु दोष या स्वास्थय  का भी दोष होगा. रक्त, फेफड़े , मानसिक अवसाद की बीमारी हो सकती है. 5 का राहू जिस दशा में होगा यानी जिन ग्रहों के प्रभाव में होगा, उसके जैसा प्रभाव होगा. मंदी स्थिति में धन, स्वास्थ्य , स्त्री सुख बाधित होंगे . पहली संतान शायद ही जिन्दा बचेगी , यदि शनि  मंदा हो . मकान औरौर औलाद का सुख मंदा होगा. औरत के टेबे में शनि की शर्त नहीं है. उसका बुध और शुक्र  सही होना चाहिए .काला कुत्ता पालकर रखें।अंगूठे को दूध में डुबो कर चूसें . औरत को दुर्गा जी की सेवा करनी चाहिए.

बारहवें भाव केतु के फल ,उपाय एवं टोटके –

लगातार तरक्की होगी .24 की उम्र के बाद धन की आमदनी शुरू हो जायगी.इज्जत , दौलत और ऐशोआराम होगा.भाई और चाचा से मदद न मिलेगी. अपना लड़का ही तादेगा.ससुराल से भी कोई मदद न मिलेगी. बिगाड़ हो सकती है.कुत्ता मदद करेगा और अपनी संतान. ऐसे व्यक्ति से कुत्ते की दोस्ती तुरंत हो जाती है.परम्परागत दौलतमंद भी हो सकता है, पर यह सम्पत्ति को  बढायेगा , बर्बाद नहीं करेगा. औलाद के जन्म से तरक्की होगी. राहू 6 के साथसाथ कोई ग्रह  न  हो तो ससुराल भी मददगार होगा . राहू के साथ 6 में मंगल हो, तो२८ तक संतान नहीं होगी.चंद्रमा हो तो .32 साल,सूरज हो, तो 42 साल, शुक्र हो तो, 25 साल की उम्र तक संतान नहीं होती.किसी संतान हीन से जमीन खरीद कर मकान बनाने या बना बनाया मकान खरीदने पर संतान हीनता होगी.

कुत्ते को न मारें, उसको रोटी खीलायें. मकान की तह में और छत पर फूल वाले पौधे लगाए.औलाद का दुःख कुत्ता पालने और साधू सेवा या गुरु ईवा से दूर होगा. दुर्गा जी का सेवन लाभ प्रद होगी . देवता दुर्गा जी और विष्णु के कोई रूप होंगें. मन्त्र भी. रत्न पन्ना और माणिक्य.

कुंडली की सेवा के लिए यहाँ क्लि क करें.

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *