आप यहाँ हैं
धर्मालय > ज्योतिष विद्या > अशुभ केतु के उपचार एवं टोटके

अशुभ केतु के उपचार एवं टोटके

अशुभ केतु के उपचार एवं टोटके

प्रथम भाव –

  • काला और सफ़ेद दुरंगा कुत्ता पालें। या ऐसे कुत्ते की देखभाल करें।
  • गली के आखिरी मकान में न रहे।
  • चंद्रमा के निर्दिष्ट उपचार करें।
  • लाल रंग का रुमाल/कपड़ा जेब में रखें।

द्वितीय भाव –

  • सदाचार का निरंतर पालन करें।
  • नौ वर्ष से कम आयु की कन्याओं की सेवा करें।

तृतीय  भाव –

  • यात्रा में दुर्घटना और नुक्सान से बचे रहने के लिए सूर्य और चंद्रमा से सम्बन्धित वस्तुएं बहते पानी में डालें।
  • सोना पहने ।
  • गुरु की वस्तुएं बहते पानी में डालें।

चतुर्थ भाव  –

  • पूजालयों में गुरु की वस्तुओं का दान करें।
  • कुल-पुरोहित की सेवा करें।

पंचम भाव –

  • पूजा-पाठादि द्वारा गुरु की शांति करें।
  • शनि की वस्तुएं बंध करके न रखें। लोहे के संदूक खुले रखें। दरवाजों में लोहे के ताले न लगायें।

षष्ठ भाव –

  • दहेज़ में मिली हुई अंगूठी बायें हाथ में पहने।
  • पंचम भाव में दिए गये उपचार इस भाव में भी करें।

सप्तम भाव –

  • ईंधन के चार-चार टुकडें चार दिन तक बहते पानी में डालें।
  • चार दिन तक प्रति दिन चार-चार निम्बू बहते पानी में डालें।

अष्टम भाव –

  • पूजालयों में काले – सफेद रंग के कम्बल दान करें।
  • एक ही भाव में स्थित ग्रहों की वस्तुओं के साथ-साथ काले घोले रंग के कम्बलों के टुकडें शमशान –भूमि में दबाएँ।

नवम भाव –

  • टॉप्स या बालियों के रूप में कानों में सोना पहनें।
  • घर में सोने के बिस्कुट रखें।

दशम भाव –

  • घर की नींव के पत्थर तले दूध और शहद रखें।
  • 48 वर्ष की आयु के बाद घर में पालतू कुत्ता रखें।
  • अच्छा व्यवहार और अच्छा चाल – चलन बनाएं रखें।
  • चाँदी के बर्तन में शहद रखें।

एकादश भाव  –

  • काला कुत्ता पालकर रखें।
  • अंगूठे को दूध में डुबो कर चूसें
  • काला – धोला कुत्ता पालें।

 

कुंडली की सेवा के लिए यहाँ क्लिक करें.

Leave a Reply

Top