खिलाया पिलाया निकालने की विधि – अभिचार कर्म, निदान और उपाय

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इस पर हम पहले प्रकाश डाल चुके है। ये दो प्रकार के होते हैं। दूर से मंत्र – तन्त्र अनुष्ठान द्वारा या खिला-पिला कर। पहले की सुरक्षा के लिए पूर्व से उपाय किये जा सकते है; पर दूसरे से पूर्व रक्षा का कोइ उपाय नहीं है। इसमें सतर्क रहना ही एक मात्र उपाय है।

क्रिया से या खिलाने-पिलाने से पीड़ित व्यक्ति की चिकित्सा पूरे विवरण – लक्षण के अनुसार तंत्र क्रियाओं द्वारा ही होती है। लक्षण से ही निदान के प्रकार ढूढे जाते है; क्योंकि जो खाया – पीया हिता है या जो दूरस्थ क्रिया होता है, उसका कोई निशान नहीं होता।

फिर भी ईश्वर्मूल , अपामार्ग , इन्द्रायण, काली तुलसी की जड़ों का काढ़ा पिलाने से ( दो तीन दिन) बहुत लाभ होता है। गाय का घी और सेंधा नमक डालकर पिलाना चाहिय। रोग मुक्ति तो नहीं , पर राहत होती है।

बहुत प्रश्न आते है कि ऐसी क्रियाओं से मन्दिर या सिद्धि पीठों में भी कोई विशेष राहत नहीं मितली। कोई मंत्र –क्रिया कर रहा हो या कोई बुरी शक्ति पीछे लगी हो, तो मन्दिर , मस्जिद, गुरुद्वारे आदि में रहने पर वह वहां नहीं पहुच पाती। मगर जब पीड़ित पहले से प्रभावित हो गया हो, तो यहाँ विशेष राहत इसलिए नहीं मिलती कि विषाक्त असर शरीर के ऊर्जा चक्रों , मांस, – मज्जा , नसों-अंगों में व्याप्त हो गया होता है। मन्दिर में लाभ वहां की एक विशेष ऊर्जा के कारन होता है। वह इसे निकालने में सक्षम नहीं हो पाती। पर राहत तो मिलती ही है।

पैरों के तलवे , सर के चाँद , कमर का मूलाधार और उसकी हड्डी, रीढ़ की हड्डी , नाभि , पेट , इससे तुरंत प्रभावित होते है। इसके बाद मस्तिष्क , आँखें, रात की नींद और ह्रदय की धड़कन प्रभावित होती है। भय लगता है, आँखों के सामने अदृश्य परछाइयाँ आती-जाती है, भयानक एक ही प्रकार के सपने, विकृत भयानक चेहरे आदि नजर आते है। लगता है कि उसके अंदर उसके अतिरिक्त कोई और है, बिस्तर में कोई और अनुभूत होता है आदि इसके अनेक लक्षण होते है। इसके अतिरिक्त बदबू, पैखाना-पेशाब में बदबू , अति कामुक सपने, अकारण भय, बदन दर्द , चलते समय एकाएक सुधि विस्मृत होना, किसी के साथ का अहसास – इसके इतने रूप है कि इनका वर्णन संभव नहीं है। एक-दो बार कोई अनुभूति हो या स्वप्न आदि आये , तो वह सामान्य है। पर बार-बार एक ही प्रकार की अनुभूतियाँ हो; तो वह अभिचार कर्म है।

डॉक्टरी क्षेत्र ५० वर्ष पहले के अपने ज्ञान की माला जप रहा है। आज तो विज्ञान भी बता रहा है की सूक्ष्म स्थूल से अधिक शक्तिशाली और चमत्कारिक होता है। फोन, रिमोट, उपग्रह सभी इन ऊर्जा तंरगों के सूत्र पर चलते है। यदि इन तरंगों का कोई अन्य विज्ञान प्राचीनकाल से है, तो उसे न कारना बौद्धिक अहंकार के सिवा कुछ भी नहीं ।

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6 Comments on “खिलाया पिलाया निकालने की विधि – अभिचार कर्म, निदान और उपाय”

  1. Mere son ki sadi bahut prayas ke bad bhi nahi ho pa rahi hai.uska nam Rajan, dob-26/06/1988,birth time-3.30am, sthal-surat(gujarat).him bahot pareshan hai, pl. turant upay bataye.

      1. Shikhar se khadde me girne tak ki yatra hai…mere sare raaz meri sari taakat meri sari kamjori mujhse se hi uglwa li or mujhe se taakat lekar mujhe gira dia…or mai apni raksha bhi nahi kar paya

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