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अप्सरा की गुप्त साधनायें (विधि)

शुक्ल पंचमी से कालरात्री में एकान्त कमरे मे यंत्र स्थापित करके धूप दीप दिखा कर पूजा करें और यथा स्म्भव निधाेरित संख्या में जप करें .जप संख्या २५००० है .

यंत्र –विन्दुवृत,वृत, अधोमुखी त्रिकोण,दो रेखाओं वाला वृतषष्टदल कमल ,षटकोण ,वृत,अष्टकोण ,वृत,अष्टदल कमल,चतुरस्त्र. लालरंग में चमेली, गुलाब ,अनार, दालचीनी, कपूर ,मिला कर उत्तरामुखी हो कर लिखें.२१००मंत्रों से सिद्ध करें .

दिशा–उत्तरामुखी

न्यास दिगबन्धन यक्छिणी की तरह

मंत्र –ऊँ ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं क्लीं क्लीं (नाम) क्लीं क्लीं श्रीं श्रीं ह्रीं ह्रीं ऊँ फट् स्वाहा

प्रकट होने पर उसे बहन,पत्नी, प्रेमिका आदि रिश्तों में बाँधें

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