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अपामार्ग पर प्रयोग

अपामार्ग एक पौधा है, जो झाड़ियों के रूप में बरसात के अन्तिम दिनों दिनों उत्पन्न होता है | इसमें लम्बी-लम्बी शीर्ष डालियां बिना पत्तो की होती हैं और और उसमें कांटेदार छिलकों में बीज लगते हैं | इसे कई स्थानों पर चिडचिडा भी खा जाता है |

अपामार्ग की आयुर्वेद में ही तंत्र विज्ञान में भारी महिमा गायी गयी हैं | मस्तिष्क के कीड़े, बलगम, गंदगी, कीटाणु एवं विषाणु आदि निकालने के लिए इसकी जड़ को घिसकर उसमें बीज पीसकर मिलायें और ललाट पर लेप करें, नस्य लें, तो मस्तिष्क के सरे विकार दूर हो जाते हैं | छाती पर लेप करें, तो छाती का बलगम विकार दूर हो जाता है | तंत्रोक्त विधि से इसकी जड़ को उखाड़कर प्रसव के समय किसी महिला की कमर में बांध दिया जाये, तो प्रसव बिना कठिनाई के हो जाता है | तंत्र शास्त्र में खा गया है कि कैंची लेकर तैयार रहें | जैसे ही प्रसव सम्पूर्ण हो, इसको काट डालें, वरना गर्भाशय भी बाहर आ जायेगा |

प्रयोग 1- अपामार्ग की जड़ को , इसके पौधे के पंचांग को या इनके बीजों को हरे कपड़े में बांधकर हरे रंग के शीशे के पिरामिड से ढककर 3 दिन रखें (खुले में, भूमि से सम्पर्कीत ), तो इस औषधि में दैवीय शक्तियां आ जाती हैं |

प्रयोग 2- यदि उचित भूमि पर लगे अपामार्ग के नन्हें पौधे की किसी हरे रंग के पिरामिड (रंग शीशे में ही होना चाहिए, पेंटिंग नहीं, अर्थात् शीशा पारदर्शी होना चाहिए) से ढककर छोड़ दिया जाये, तो यह पौधा पकने पर कई प्रकार के विलक्षण गुणों से संपन्न हो जाता है | इसके बीजो को पीसकर कपड़े से छानकर इसमें काली गाय के गोबर की राख को बराबर मात्रा में छानकर मिलकर कर रख लें | इसका नस्य सभी प्रकार के विकरों को दूर करता है | इससे भूत-प्रेत भाग जाते हैं, उन्माद, हिस्टीरिया, मिरगी जैसे रोग दूर हो जाते हैं | इसे शहद में मिलकर तलवों पर लगाने से समस्त प्रकार के रक्तविकार दूर हो जाते हैं |

ऐसे पौधे की जड़ में उसके जन्मजात गुण तो रहते ही हैं, इसके अतिरिक्त कुछ चमत्कारिक गुण भी आ जाते हैं | ताम्बें के तावीज में या हरे रंग के कपड़े के तावीज में इसे बाजू में बांधने से या कमर में पहनाने से स्त्रियों का गर्भ नहीं ठहरता, मोटापा दूर हो जाता है, साडी फालतू चर्बी निकल जाती है, रतिइच्छा बढ़ती है, आदि-आदि |

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