अघोर,अघोरी, अघोर मार्ग का रहस्य; संक्षिप्त व्याख्या और आधार सूत्र

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यहाँ वर्णित व्याख्या अघोर पंथ के गुप्त शास्त्रीय रूप की आधुनिक विज्ञानिक व्याख्या है. यह अघोर पंथ की नहीं, उसके आधार सूत्रों एवं स्वरुप की व्याख्या  है . यह इस रूप में कहीं भी किसी भाषा में उपलब्ध नहीं है . यह मौलिक  है ,इसलिए बिना धर्मालय के नाम का उल्लेख किये इसका कहीं भी उपयोग करना वर्जित है .

अघोर का अर्थ होता है निर्मल; वह, जिसमे मल न हो. तंत्र या आध्यात्म के किसी भी मार्ग में केवल परमात्मा तत्व ही निर्मल माना जाता है. इसलिए इसका अर्थ है परमात्मा. तंत्र में परमात्मा को सदाशिव कहा जाता है; इसलिए अघोर का तांत्रिक अर्थ है सदाशिव. यह उपनिषदों  का निर्गुण परमात्मा है. केवल यही मल हीन  है, शेष सभी अणु मल से युक्त हैं.

प्रश्न यह उठता है कि यह अणु मल क्या है?

अघोरपंथ के आचार्यों ने कहा है कि जब सदाशिव परमात्मा मुक्त रूप में होता है, यानी जब सृष्टि नहीं होती, तब वह निर्मल निर्विकार होता है. पर जब उसमें सृष्टि-बीज के रूप में पहले अणु [परमाणु ] का उदय होता है, शुद्ध परमात्मा तत्व होते हुए भी, यह अणु घूर्णन बल, एवं अन्य गतियों की डोर में बंध कर अज्ञानता के मल से ग्रसित हो कर स्वयं को एक अलग अस्तित्व समझने लगता है और स्वयं के अहंकार से ग्रसित हो जाता है. यह प्रकृति इसी अणु का विकसित रूप है और इसकी प्रत्येक इकाई उसकी प्रतिलिपि; इसलिए सभी की चेतना मल विकार से ग्रसित होती है.

प्रत्येक अणु एक जीव है. प्रत्येक में चेतना है. मल विकार के कारण यह एक ही चेतना तीन रूपों में अभिव्यक्त होती है. घोर,अघोर, और घोराघोर. जब स्वयं के अहंकार के सिवा कोई बोध नहीं होता, तो यह चेतना का घोर रूप है. जब स्वयं के अतिरिक्त अनुभूतियों से परे भी जानने  समझने की जिज्ञासा होती है और यह जिज्ञासा जगती है कि अनुभूतियों से परे भी कुछ है और वह जानने की और प्रवृत होता है, तो वह घोराघोर है. जो प्रयत्न करके उस परमात्मा तत्व को जान कर निर्मल चित्त हो जाता है, वह अघोर है. उसे साक्षात् सदाशिव ही समझना चाहिए.

जो इस मार्ग से साधना में प्रवृत हैं, उन्हें अघोरी कहा जाता है. यह धारणा गलत है कि अघोर मार्ग के प्रवर्तक नाथ सम्प्रदाय थे. नाथ सम्प्रदाय ने इसे अपना लिया था. पुराने विवरण बताते हैं कि यह बहुत पुराना मार्ग है और इसके प्रवर्तक का पता लगाना संभव नहीं है. प्राचीनतम गुप्त श्लोंको में, जो गुप्त अघोरियों से प्राप्त हुए थे, इसके प्रवर्तक का नाम सदाशिव बताया गया है, पर यह एक आध्यात्मिक कथन है.

इसकी साधनों की श्रृंखला  इतनी  रहस्यमय और विशाल है कि तीन चार वर्ष वर्णन करता रहूँ तब भी पूरा नहीं होगा. यहाँ यह जानना दिलचस्प होगा कि आप जो भी अघोर पंथ और उसकी साधनों के बारे में जानतें हैं वह नकली है. इसे टी वी – सिनेमां वालों ने और भी भयानक मजाक बना दिया है. इसी का फायदा ये नकली लोग वेशभूषा बना कर उठा रहे हैं. इस पंथ में क्या तंत्र के किसी भी पंथ में जो मूर्ख श्लोकों के शाब्दिक अर्थ को शास्त्र का प्रमाण मानता है, वह या तो बेमौत मारा जाता है, या सारा जीवन नष्ट करके नरक में जाता है. यह मैं नहीं कह रहा; प्राचीन आचार्यों का भी यही कथन है. तंत्र में जो कहा गया है वो अपने शिष्यों के लिए कहा गया है, और सभी शब्दों के गूढ़ अर्थ हैं. जिसे वही समझ सकता है, जिसके गुरू ने उसका अर्थ पहले ही बता रखा है अघोर पंथ में भी चिता, शमशान, शव-भक्षण आदि का विशेष अर्थ है.           

 

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6 Comments on “अघोर,अघोरी, अघोर मार्ग का रहस्य; संक्षिप्त व्याख्या और आधार सूत्र”

  1. दिलीप पाटील अघोरी विद्या सिखा हुए मुझे तांत्रिक विद्या पुरी सिखनी है

  2. में तंत्र और सिद्धि प्राप्ति बिद्या शीखना चाहता हूँ। कृपया मार्ग दरसन करे।

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